ध्यान के लिए क्या करना और क्या नही करना चाहिए?


– आपकी जैसी जीवनशैली है आप वैसे ही जीवन व्यतीत कर सकते हैं। भगवान की तरफ से कोई बधंन ही है कि आपको कैसे जीना है।अपने शरीर की सेहत का ख्याल रखें। ध्यान के दौरान सोये नही। यदि सो गए तो दिमाग का मन से संपर्क टूट जाएगा। अगर नींद में ध्यान होता तो सभी लोग योगी बन गए होते।


नींद में दिमाग सो जाता है। जब दिमाग सो जाता है, मन का संपर्क कुछ घंटों के लिए दिमाग से छूट जाता है। अब मन बिना दिमाग के सोच भी नही सकता। इसलिए गहरी निंद्रा में आनंद की अनुभूति होती है जब आपको संसार की चेतना नही होती ।मदिरा एवं नशीले पदार्थ सेवन करने वालो का और बुरा हाल है। नशे की वजह से दिमाग की तंरगे दब जाती हैं और मन दिमाग की तंरगो को नही पकड़ पाता। ऐसे में व्यक्ति अस्थाई रूप से आंनद अनुभव कर सकता है और असामान्य स्वभाव का हो सकता है। व्यक्ति भले ही कुछ पलो के लिए आनंद अनुभव कर सकता है किन्तु कुछ समय के बाद दिमाग एवं शरीर के अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। इनसे मन की शु़द्धि नही होती और न ही मन काबू में आता है। ध्यान में दिमाग की सेहत को संभालते हुए आप मन को अपने आप शांत रखने की आदत डालते हैं और अपने नियंत्रण में रखते हैं।


इस क्रिया-पद्धति से पिछले संस्कार,विचार एवं दृश्य साफ होने लगते हैं और अंततः मन अपने मूल स्वभाव जोशाश्वत परम शांति है को पाता है। भोजन सात्विक् लेना चाहिए। वायु या जलन होगी तो ध्यान में मन नही लगेगा। अल्पहार करने से ध्यान में मदद मिलेगी। यदि भोजन सात्विक नही होगा तो दिमाग में अवसाद होगा और ध्यान लगाने में कठिनाई होगी। मेरे गुरू ने भोजन के लिए कोई सलाह नही दी क्योंकि विभिन्न देशों में मौसम और आदतो के अनुसार विभिन्न भोजन प्रचलित है। साग,हरी सब्ज़ियाँ लाभकारी
हैं क्योंकि यह पाचन क्रिया में मदद करती हैं और अवसाद पैदा नहीं करती।तो यदि आप अपने सेहत का इस तरह ख्याल रखेंगे तो आप ध्यान का अभ्यास कर सकते हैं।

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